22-07-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अब तुम्हें नई दुनिया में चलना है, यह दु:ख के दिन पूरे हो रहे हैं, इसलिए पुरानी बीती हुई बातों को भूल जाओ''

प्रश्नः-
तुम कर्मयोगी बच्चों को कौन सा अभ्यास निरन्तर करना चाहिए?

उत्तर:-
अभी-अभी शरीर निर्वाह अर्थ देह में आये और अभी-अभी देही-अभिमानी। देह की स्मृति बिगर कर्म तो हो नहीं सकता इसलिए अभ्यास करना है कि कर्म किया, देह-अभिमानी बनें फिर देही-अभिमानी बन जाओ, ऐसा अभ्यास तुम बच्चों के सिवाए दुनिया में कोई कर नहीं सकता।

गीत:-
जाग सजनियां जाग...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ज्ञान और योग पर पूरा-पूरा अटेन्शन देना है। सुनने समय बहुत शान्त, एकाग्रचित होकर बैठना है। कर्मयोगी भी बनना है।

2) बाप ने जो घर का रास्ता बताया है, वह सबको बताना है। स्वदर्शन चक्रधारी बनने के साथ-साथ ज्ञान शंख भी बजाना है।

वरदान:-
महान् और मेहमान - इन दो स्मृतियों द्वारा सर्व आकर्षणों से मुक्त बनने वाले उपराम व साक्षी भव

उपराम वा साक्षीपन की अवस्था बनाने के लिए दो बातें ध्यान पर रहें - एक तो मैं आत्मा महान् आत्मा हूँ, दूसरा मैं आत्मा अब इस पुरानी सृष्टि में वा इस पुराने शरीर में मेहमान हूँ। इस स्मृति में रहने से स्वत: और सहज ही सर्व कमजोरियां वा लगाव की आकर्षण समाप्त हो जायेगी। महान् समझने से जो साधारण कर्म वा संकल्प संस्कारों के वश चलते हैं, वह परिवर्तित हो जायेंगे। महान् और मेहमान समझकर चलने से महिमा योग्य भी बन जायेंगे।

स्लोगन:-
सर्व की शुभ भावना और सहयोग की बूंद से बड़ा कार्य भी सहज हो जाता है।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

पावरफुल मन की निशानी है - सेकण्ड में जहाँ चाहे वहाँ पहुंच जाए। मन को जब उड़ना आ गया, प्रैक्टिस हो गई तो सेकण्ड में जहाँ चाहे वहाँ पहुंच सकता है। अभी-अभी साकार वतन में, अभी-अभी परमधाम में, सेकण्ड की रफ्तार है - अब इसी अभ्यास को बढ़ाओ तो याद शक्तिशाली बन जायेगी।