22-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम सेन्सीबुल बने हो तो कमाई का बहुत-बहुत
शौक रहना चाहिए। धन्धे आदि से भी समय निकाल बाप को याद करो तो कमाई होती रहेगी''
प्रश्नः-
तुम बच्चों को
अभी कौन सी ऐसी श्रीमत मिलती है, जो कभी नहीं मिली?
उत्तर:-
1- तुम्हें इस
समय बाप श्रीमत देते हैं - मीठे बच्चे, सवेरे-सवेरे उठकर बाप की याद में बैठो तो
पूरा वर्सा मिलेगा। 2- गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान रहो, ऐसी श्रीमत दूसरे
सतसंगों में कभी मिल नहीं सकती। उन सतसंगों में बाप और वर्से की बात नहीं।
गीत:-
तुम्हीं हो
माता पिता......
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
किसी भी देहधारीं को याद कर अपना टाइम वेस्ट नहीं करना है। ऐसा कोई रांग कर्म न हो
जो विकर्म बन जाए।
2) जीते जी सब कुछ
भूल एक बाप को याद करना है। शरीर निर्वाह अर्थ कर्म भी करना है। साथ-साथ सेन्सीबुल
बन रात में भी जागकर यह अविनाशी कमाई करनी है। याद का चार्ट रखना है।
वरदान:-
सम्पूर्ण
स्टेज और स्टेटस की स्मृति से सदा ऊंच कर्तव्य करने वाले बाप समान भव
सदैव यह स्मृति में
रहे कि मैं हर समय, हर सेकण्ड, हर कर्म करते हुए स्टेज पर हूँ तो हर कर्म पर
अटेन्शन रहने से सम्पूर्ण स्टेज के नजदीक आ जायेंगे। साथ-साथ वर्तमान और भविष्य
स्टेटस की स्मृति रहने से हर कर्म श्रेष्ठ होगा। यही दो स्मृतियां बाप समान बना
देंगी। समानता में आने से एक दो के मन के संकल्पों को सहज ही कैच कर लेंगे। इसके
लिए सिर्फ संकल्पों पर कन्ट्रोलिंग पावर चाहिए। अपने संकल्पों की मिक्सचर्टी न हो।
स्लोगन:-
ईर्ष्या और
अप्राप्ति का कारण इच्छायें हैं, जहाँ सर्व प्राप्तियां हैं वहाँ प्रसन्नता है।
ये अव्यक्त इशारे -
अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
हर सेकेण्ड, हर
संकल्प चेक करो कुछ दिया? लिया तो नहीं? देते जाओ। लेना है बाप से, वह तो ले ही लिया,
अब देना है। जितना-जितना देने में बिज़ी होंगे तो कोई भी बातें क्रास करना मुश्किल
नहीं लगेगा। सब बातें बहुत सहज हो जायेंगी क्योंकि महादानी बनने से महान् शक्ति की
प्राप्ति स्वत: होती है।