23-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - भोलानाथ मोस्ट बील्वेड बाप तुम्हारे सम्मुख बैठे हैं, तुम प्यार से याद करो तो लगन बढ़ती जायेगी, विघ्न खत्म हो जायेंगे''

प्रश्नः-
ब्राह्मण बच्चों को कौन सी बात सदा याद रहे तो कभी भी विकर्म न हो?

उत्तर:-
जो कर्म हम करेंगे, हमें देख और भी करेंगे - यह याद रहे तो विकर्म नहीं होगा। अगर कोई छिपाकर भी पाप कर्म करते तो धर्मराज से छिप नहीं सकता, फौरन उसकी सजा मिलेगी। आगे चल और भी मार्शल लॉ हो जायेगा। इस इन्द्र सभा में कोई पतित छिप कर बैठ नहीं सकता।

गीत:-
भोलेनाथ से निराला....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) यह समय बहुत नाज़ुक है इसलिए कोई भी उल्टा कर्म नहीं करना है। कर्म-अकर्म-विकर्म की गति को ध्यान में रख सदा श्रेष्ठ कर्म करने हैं।

2) योग से सदा के लिए अपनी काया निरोगी बनानी है। एक बील्वेड मोस्ट बाप को ही याद करना है। बाप से जो अविनाशी ज्ञान का धन मिलता है, वह दान करना है।

वरदान:-
सहनशीलता के गुण द्वारा कठोर संस्कार को भी शीतल बनाने वाले सन्तुष्टमणी भव

जिसमें सहनशीलता का गुण होता है वह सूरत से सदैव सन्तुष्ट दिखाई देता है, जो स्वयं सन्तुष्ट मूर्त रहते हैं वह औरों को भी सन्तुष्ट बना देते हैं। सन्तुष्ट होना माना सफलता पाना। जो सहनशील होते हैं वह अपनी सहनशीलता की शक्ति से कठोर संस्कार वा कठिन कार्य को शीतल और सहज बना देते हैं। उनका चेहरा ही गुणमूर्त दिखाई देता है। वही ड्रामा की ढाल पर ठहर सकते हैं।

स्लोगन:-
जो वाणी द्वारा नहीं बदलते उन्हें शुभ वायब्रेशन द्वारा बदल सकते हो।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

जैसे ब्रह्मा बाप के बोल फरिश्तों के बोल, कम बोल और मधुर बोल थे। ऐसे यथार्थ बोल बोलो। कारोबार के लिए बोलना पड़ता है लेकिन वह भी लम्बा नहीं करो। हर संकल्प, बोल और कर्म में फालो फादर करो। हर बोल में मधुरता, नम्रता की महानता हो। इसके लिए स्वयं को निमित्त समझकर हर कार्य करो तब महानता के साथ नम्रता आयेगी और सफलतामूर्त बनेंगे।