23-08-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 31.03.2011 "बापदादा" मधुबन
दृढ़ संकल्प द्वारा
“टेन्शन फ्री'' का एक्जैम्पुल बन सबके आधारमूर्त बनो, मन्सा शक्ति द्वारा दु:खी
आत्माओं को खुशी का वरदान दो
वरदान:-
मनन शक्ति
द्वारा शक्तिशाली बन विघ्नों के फोर्स को समाप्त करने वाले सर्व आकर्षण मुक्त भव
वर्तमान समय मनन शक्ति
द्वारा आत्मा में सर्व शक्तियां भरने की आवश्यकता है। इसके लिए अन्तर्मुखी बन हर
प्वाइंट पर मनन करो तो मक्खन निकलेगा और शक्तिशाली बन जायेंगे। ऐसी शक्तिशाली
आत्मायें अतीन्द्रिय सुख की प्राप्ति का अनुभव करती हैं, उन्हें अल्पकाल की कोई भी
वस्तु अपने तरफ आकर्षित नहीं कर सकती। उनकी मगन अवस्था द्वारा जो रूहानियत की
शक्तिशाली स्थिति बनती है उससे विघ्नों का फोर्स समाप्त हो जाता है।
स्लोगन:-
ब्राह्मण संसार में सर्व का सम्मान प्राप्त करने वाले ही तख्तनशीन बनते हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो
ब्रह्मा बाप और शिव
बाप की विशेष पसन्दगी है ही पवित्रता। लेकिन पवित्रता की परिभाषा बहुत श्रेष्ठ और
गुह्य है। पवित्रता जहाँ होगी वहाँ निश्चय, सच्चाई-सफाई, ये सब आ जाता है। सम्पूर्ण
पवित्रता का अर्थ ही है - स्वप्न-मात्र भी अपवित्रता मन और बुद्धि को टच नहीं करे,
इसी को ही कहा जाता है सच्चे वैष्णव।