25-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप दूरदेश से आये हैं तुम बच्चों के लिए नया राज्य स्थापन करने, तुम अभी स्वर्ग के लायक बन रहे हो''

प्रश्नः-
जिन बच्चों का शिवबाबा में अटूट निश्चय है उनकी निशानी क्या होगी?

उत्तर:-
वह ऑख बन्द करके बाबा की श्रीमत पर चलते रहेंगे, जो आज्ञा मिले। कभी ख्याल भी नहीं आयेगा कि इसमें कुछ नुकसान न हो जाए क्योंकि ऐसे निश्चयबुद्धि बच्चों का रेसपान्सिबुल बाप है। उन्हें निश्चय का बल मिल जाता है। अवस्था अडोल और अचल हो जाती है।

गीत:-
तुम्हीं हो माता, तुम्हीं पिता हो...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सर्विस में हड्डियाँ देनी हैं, किसी भी बात में संशय नहीं उठाना है। सबको सर्विस से सुख देना है, दु:ख नहीं।

2) निश्चय के बल से अपनी अवस्था को अडोल बनाना है। जो श्रीमत मिलती है, उसमें कल्याण समाया हुआ है, क्योंकि रेसपान्सिबुल बाप है इसलिए फिकर नहीं करना है।

वरदान:-
योगयुक्त स्थिति द्वारा सूक्ष्म व कड़े बंधनों को क्रास करने वाले बन्धनमुक्त भव

योगयुक्त की निशानी है - बन्धनमुक्त। योगयुक्त बनने में सबसे बड़ा अन्तिम बंधन है - स्वयं को समझदार समझकर श्रीमत को अपने बुद्धि की कमाल समझना अर्थात् श्रीमत में अपनी बुद्धि मिक्स करना, जिसे बुद्धि का अभिमान कहा जाता है। 2-जब कभी कोई कमजोरी का इशारा देता है अथवा बुराई करता है - यदि उस समय जरा भी व्यर्थ संकल्प चला तो भी बंधन है। जब इन बंधनों को क्रास कर हार-जीत, निंदा-स्तुति में समान स्थिति बनाओ तब कहेंगे सम्पूर्ण बन्धनमुक्त।

स्लोगन:-
पहले सोचना फिर करना - यही ज्ञानी तू आत्मा का गुण है।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

जैसे अन्जान बच्चा नुकसान वाली चीज़ को खिलौना समझता है तो उसे कुछ देकर छुड़ाना पड़ता है, ऐसे जो अल्पकाल का मान शान वा अल्पकाल की इच्छा रखते हैं, उन्हें मान देकर स्वयं निर्मान बन जाओ। उस समय यदि उन्हें शिक्षा देंगे तो टकराव पैदा होगा इसलिए ऐसे समय पर युक्तियुक्त चलन से, परोपकारी बन क्षमा भाव से सम्मान देकर पहले उन्हें समझदार बनाओ, जिससे वह स्वयं महसूस करे कि यह बात नुकसानकारक है।