26-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 31.12.2009 "बापदादा" मधुबन
“नये वर्ष में सभी
आत्माओं को सन्देश देकर गोल्डन वर्ल्ड की गिफ्ट दो, बाप समान बनने के लिए
देही-अभिमानी रहने की नेचर नेचुरल बनाओ''
वरदान:-
सर्विस वा
पुरुषार्थ में सफलता प्राप्त करने वाले डबल ताजधारी भव
संगमयुग पर सदा स्वयं
को डबल ताजधारी समझकर चलो - एक लाइट अर्थात् प्युरिटी का ताज और दूसरा -
जिम्मेवारियों का ताज। प्युरिटी और पावर - लाइट और माइट का क्राउन धारण करने वालों
में डबल फोर्स सदा कायम रहता है। ऐसी डबल फोर्स वाली आत्मायें सदा शक्तिशाली रहती
हैं। उन्हें सर्विस वा पुरुषार्थ में सदा सफलता प्राप्त होती है।
स्लोगन:-
दिव्य गुणों के आधार पर मन-वचन और कर्म करना ही दिव्यता है।
ये अव्यक्त इशारे -
महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
कोई भी चीज़ को गर्म
कर नर्म किया जाता है, फिर मोल्ड किया जाता है। यहाँ भी गर्माई है शक्ति रूप और
नर्माई है निर्मानता अर्थात् स्नेह रूप। जिसमें हर आत्मा प्रति स्नेह होगा वही
नम्रचित रह सकता है। स्नेह नहीं है तो न रहमदिल बन सकेंगे, न नम्रचित। शक्तिरूप में
है मालिकपन और नम्रता में है सेवा का गुण। तो जब यह नर्माई और गर्माई दोनों रहेंगे
तब हर बात में मोल्ड हो सकेंगे।