26-08-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम गैरन्टी करते हो कि हम अपने ही योगबल
से इस भारत को स्वर्ग बनायेंगे, वहाँ एक धर्म, एक राज्य होगा''
प्रश्नः-
माया के किस
विघ्न से सेफ रहने वाले बहुत अच्छी कमाल कर सकते हैं?
उत्तर:-
माया का सबसे
बड़ा विघ्न है - देह-अभिमान में लाकर एक-दो के नाम रूप में फँसाना। जो बच्चे इस
विघ्न से सेफ रहते, माया के धोखे से बचे रहते, वे बहुत कमाल कर दिखाते हैं। उनकी
बुद्धि में सर्विस के नये-नये ख्यालात चलते रहते हैं। सर्विस में उन्नति तब होगी जब
देही-अभिमानी होंगे।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
तुम बच्चे लड़ाई के मैदान में हो, माया रावण से तुम्हारी युद्ध है। माया बहुत विघ्न
डालती है। बच्चों को बहुत सावधान रहना चाहिए।
2) हर एक को अपनी
उन्नति के लिए विचार करना है। चित्रों पर कैसे समझायें, सर्विस को कैसे बढ़ायें।
चित्रों में ऐसा क्या डालें जो मनुष्य सहज समझ जाएं।
वरदान:-
देह-अभिमान के
त्याग द्वारा श्रेष्ठ भाग्य बनाने वाले सर्व सिद्धि स्वरूप भव
देह-अभिमान का त्याग
करने अर्थात् देही-अभिमानी बनने से बाप के सर्व संबंध का, सर्व शक्तियों का अनुभव
होता है, यह अनुभव ही संगमयुग का सर्वश्रेष्ठ भाग्य है। विधाता द्वारा मिली हुई इस
विधि को अपनाने से वृद्धि भी होगी और सर्व सिद्धियां भी प्राप्त होंगी। देहधारी के
संबंध वा स्नेह में तो अपना ताज, तख्त और अपना असली स्वरूप सब छोड़ दिया तो क्या
बाप के स्नेह में देह-अभिमान का त्याग नहीं कर सकते! इसी एक त्याग से सर्व भाग्य
प्राप्त हो जायेंगे।
स्लोगन:-
क्रोध मुक्त
बनना है तो स्वार्थ के बजाए नि:स्वार्थ बनो, इच्छाओं के रूप का परिवर्तन करो।
ये अव्यक्त इशारे -
अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो
बाप के साथ आप सबने
भी पान का बीड़ा उठाया है कि पवित्रता द्वारा हम प्रकृति को भी पावन करेंगे। तो ये
संकल्प पूरा करने के लिए बापदादा चाहते हैं कि विश्व का हर एक बच्चा पहले लगाव
मुक्त बने - चाहे साधनों से, चाहे व्यक्ति से। साधनों को यूज़ करना और चीज़ है,
लगाव अलग चीज़ है। तो बापदादा हर बच्चे को पहले लगाव-मुक्त बनाना चाहते हैं।