27-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें फूल बन सबको सुख देना है, फूल बच्चे मुख से रत्न निकालेंगे''

प्रश्नः-
फूल बनने वाले बच्चों प्रति भगवान की कौन सी ऐसी शिक्षा है, जिससे वह सदा खुशबूदार बना रहे?

उत्तर:-
हे मेरे फूल बच्चे, तुम अपने अन्दर देखो - कि मेरे अन्दर कोई आसुरी अवगुण रूपी कांटा तो नहीं है! अगर अन्दर कोई कांटा हो तो जैसे दूसरे के अवगुण से ऩफरत आती है वैसे अपने आसुरी अवगुण से ऩफरत करो तो कांटा निकल जायेगा। अपने को देखते रहो - मन्सा-वाचा-कर्मणा ऐसा कोई विकर्म तो नहीं होता है, जिसका दण्ड भोगना पड़े!

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) माया की ग्रहचारी से बचने के लिए मुख से सदैव ज्ञान रत्न निकालने हैं। संग दोष से अपनी सम्भाल रखनी है।

2) खुशबूदार फूल बनने के लिए अवगुणों को निकालते जाना है। श्रीमत पर बहुत-बहुत नम्र बनना है। काम महाशत्रु से कभी भी हार नहीं खानी है। युक्ति से स्वयं को बचाना है।

वरदान:-
शक्तियों को करामत के बजाए कर्तव्य समझकर प्रयोग करने वाले पूजन वा गायन योग्य भव

याद द्वारा जो शक्तियों की प्राप्ति होती है उन्हें करामत समझकर प्रयोग नहीं करना लेकिन कर्तव्य समझकर कार्य में लगाना। उन मनुष्यों के पास रिद्धि सिद्धि की करामत होती है लेकिन आपके पास है श्रीमत। श्रीमत से शक्तियां जरूर आती हैं इसीलिए संकल्प से कर्तव्य सिद्ध होते हैं। संकल्प से किसको कार्य की प्रेरणा दे सकते हो, यह भी शक्ति है लेकिन श्रीमत में जब अपनी मनमत मिक्स न हो तब गायन और पूजन योग्य बनेंगे।

स्लोगन:-
किसी भी प्रकार की हलचल में दिलशिकस्त होने के बजाए बड़ी दिल वाले बनो।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

जो सरलचित हैं वही मधुरता के गुण सम्पन्न हैं, वही सदा हर्षित रहते हैं। हर्षितचित हैं तो सबको आकर्षित करते हैं। हर्षित का अर्थ ही है अतीन्द्रिय सुख में झूमना। ज्ञान का सुमिरण करते, अव्यक्त स्थिति का अनुभव करते अतीन्द्रिय सुख में झूमना, इसको कहा जाता है हर्षित। ऐसा जो हर्षित रहता है वही आकर्षित करता है।