28-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप समान लवली बनने के लिए अपने को आत्मा बिन्दु समझ बिन्दु बाप को याद करो''

प्रश्नः-
याद में रहने की गुप्त हड्डी मेहनत हर एक बच्चे को करनी है - क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि याद के बिगर आत्मा, पाप आत्मा से पुण्य आत्मा नहीं बन सकती। जब गुप्त याद में रहे, देही-अभिमानी बनें, तब विकर्म विनाश हों। धर्मराज की सजाओं से बचने का साधन भी याद है। माया के तूफान याद में ही विघ्न डालते हैं इसलिए याद की गुप्त मेहनत करो तभी लक्ष्मी-नारायण जैसा लवली बन सकेंगे।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) धर्मराज की सजाओं से बचने के लिए याद की गुप्त मेहनत करनी है। पावन बनने का उपाय है अपने को आत्मा बिन्दी समझ बिन्दु बाप को याद करना।

2) ज्ञान में अपने आपको मिया मिट्ठू नहीं समझना है, एकरस अवस्था बनाने का अभ्यास करना है। बाप का जो फरमान है उसे पालन करना है।

वरदान:-
हर कर्म करते हुए कमल आसन पर विराजमान रहने वाले सहज वा निरन्तर योगी भव

निरन्तर योगयुक्त रहने के लिए कमल पुष्प के आसन पर सदा विराजमान रहो लेकिन कमल आसन पर वही स्थित रह सकते हैं जो लाइट हैं। किसी भी प्रकार का बोझ अर्थात् बंधन न हो। मन के संकल्पों का बोझ, संस्कारों का बोझ, दुनिया के विनाशी चीज़ों की आकर्षण का बोझ, लौकिक सम्बन्धियों की ममता का बोझ - जब यह सब बोझ खत्म हों तब कमल आसन पर विराजमान निरन्तर योगी बन सकेंगे।

स्लोगन:-
सहनशीलता का गुण धारण कर लो तो असत्यता का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

किसके संस्कार सरल, मधुर होते हैं तो वह संस्कार स्वरूप में आते हैं। जब संस्कार बापदादा के समान बन जायेंगे तो बापदादा के स्वरूप सभी को देखने में आयेंगे। जैसे बापदादा वैसे हूबहू वही गुण, वही कर्तव्य, वही बोल, वही संकल्प अनुभव होंगे। सभी के मुख से निकलेगा यह तो वही लगते हैं।