29-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अपने को आत्मा समझ आत्मा से बात करो तो फूल में खुशबू आती जायेगी, देह-अभिमान की बदबू निकल जायेगी''

प्रश्नः-
अपनी खुशबू चारों ओर फैलाने वाले सच्चे फूल वा परवाने कौन हैं?

उत्तर:-
सच्चे फूल वह जो अनेकों को आप समान खुशबूदार फूल बनायें। श्रीमत पर चल शमा पर जल मरने वाले अर्थात् पूरा-पूरा बलिहार जाने वाले, जीते जी मरने वाले सच्चे परवानों की वा ऐसे फूलों की खुशबू स्वत: ही चारों ओर फैलती है।

गीत:-
महफिल में जल उठी शमा...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं को आत्मा समझ आत्मा से बात करनी है। देही-अभिमानी बनकर सुनने-सुनाने से धारणा अच्छी होगी।

2) नींद को जीतने वाला बनना है, रात को जागकर कमाई करनी है। विचार सागर मंथन करना है। किसी भी फालतू बातों में अपना समय नहीं गँवाना है।

वरदान:-
तपस्या द्वारा अपने विकर्मो वा तमोगुण के संस्कारों को भस्म करने वाले तपस्वीमूर्त भव

जैसे अभी ईश्वरीय पालना का कर्तव्य चल रहा है ऐसे लास्ट में तपस्या द्वारा अपने विकर्मो और हर आत्मा के तमोगुणी संस्कार वा प्रकृति के तमोगुण को भस्म करने का कर्तव्य चलना है। इसके लिए सदा एकरस स्थिति के आसन पर स्थित हो अपने तपस्वी रूप को प्रत्यक्ष करो। आपकी हर कर्मेन्द्रिय से देह-अभिमान का त्याग और आत्म-अभिमानी बनने की तपस्या प्रत्यक्ष रूप में दिखाई दे।

स्लोगन:-
संस्कारों की टक्कर से बचने के लिए बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

बाप को भोलानाथ कहते हैं लेकिन ऐसा भोला नहीं है जो सामना न कर सके। भोलानाथ के साथ-साथ आलमाइटी अथॉरिटी भी है। आप भी अपने शक्ति स्वरूप को भूल सिर्फ भोले नहीं बनना, नहीं तो माया का गोला लग जायेगा। ऐसा शक्ति स्वरूप बनो जो माया सामना करने के पहले ही नमस्कार कर ले। बहुत सावधान, खबरदार-होशियार रहना।