29-08-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अपनी सेफ्टी के लिए विकारों रूपी माया के चम्बे (पंजे) से सदा बचकर रहना है, देह-अभिमान में कभी नहीं आना है''

प्रश्नः-
पुण्य आत्मा बनने के लिए बाप सभी बच्चों को कौन-सी मुख्य शिक्षा देते हैं?

उत्तर:-
बाबा कहते - बच्चे, पुण्यात्मा बनना है तो 1. श्रीमत पर सदा चलते रहो। याद की यात्रा में ग़फलत नहीं करो। 2. आत्म-अभिमानी बनने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ कर काम महाशत्रु पर जीत प्राप्त करो। यही समय है - पुण्यात्मा बन इस दु:खधाम से पार सुखधाम में जाने का।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपने घर और राजधानी को याद कर अपार खुशी में रहना है। सदा याद रहे - अब हमारी मुसाफिरी पूरी हुई, हम जाते हैं अपने घर, फिर राजधानी में आयेंगे।

2) हम शिवबाबा से ब्रह्मा द्वारा हैण्ड शेक करते हैं, वह बागवान हमें पतित से पावन बना रहे हैं। हम इस पढ़ाई से स्वर्ग की पटरानी बनते हैं - इसी आन्तरिक खुशी में रहना है।

वरदान:-
तीन प्रकार की विजय का मैडल प्राप्त करने वाले सदा विजयी भव

विजय माला में नम्बर प्राप्त करने के लिए पहले स्व पर विजयी, फिर सर्व पर विजयी और फिर प्रकृति पर विजयी बनो। जब यह तीन प्रकार की विजय के मैडल प्राप्त होंगे तब विजय माला का मणका बन सकेंगे। स्व पर विजयी बनना अर्थात् अपने व्यर्थ भाव, स्वभाव को श्रेष्ठ भाव, शुभ भावना से परिवर्तन करना। जो ऐसे स्व पर विजयी बनते हैं वही दूसरों पर भी विजय प्राप्त कर लेते हैं। प्रकृति पर विजय प्राप्त करना अर्थात् वायुमण्डल, वायब्रेशन और स्थूल प्रकृति की समस्याओं पर विजयी बनना।

स्लोगन:-
स्वयं की कर्मेन्द्रियों पर सम्पूर्ण राज्य करने वाले ही सच्चे राजयोगी हैं।

अव्यक्त इशारे - सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो

आप बच्चों को ज्ञान के साथ-साथ सच्चा रूहानी प्यार मिला है। उस रूहानी प्यार ने ही प्रभु का बनाया है। हर बच्चे को डबल प्यार मिलता है - एक बाप का, दूसरा दैवी परिवार का। तो प्यार के अनुभव ने परवाना बनाया है। प्यार ही चुम्बक का काम करता है। फिर सुनने व मरने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। संगम पर जो सच्चे प्यार में जीते जी मरता है, वही स्वर्ग में जाता है।